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Thursday, December 2, 2010

ठहराव और रफ़्तार के दरमियाँ

भागते और ठहरते हुए समय को हम कैसे सोचते हैं?

ये एक ऐसा कोना है जो कई नक्शे तैयार करता है। अजनबियों का एक ऐसा रास्ता जो शहर को बनाने मे मदद करता है। चलता है, रूकता है, भागता है, सोता है, सांसे लेता है और फिर से कहीं चल पड़ता है। कहीं पर अगर आँख रूक जाये तो इस पूरी जगह को तोड़ने का काम करती है। तोड़ना यानि खुद को मौजूद रखना।



लख्मी

Thursday, November 18, 2010

बहते रास्ते

हमेशा कुछ ताज़ा रखने के लिए - कुछ पीछे छोड़ना जरूरी महसूस होता है।
नजदीकी के अहसास को बरकरार रखने के लिए लगता है जैसे दूरी से भिड़ना जरूरी होता है।

ये भिड़ंत क्या है?

किसी चीज़ के साथ भिड़ना और किसी चीज़ को साथ लेकर उड़ान भरना दोनों के बीच में एक सकेंत का दृश्य होता है।