Thursday, March 11, 2010

बोद्धिक जीवन और समाजिक बहस

कला और समाजिक जीवन के बीच की बुनियादी बहस से और भिड़ंत से बनता है बोद्धिक जीवन। एक ऐसा जीवन जो "जीवन" को महज़ अनुभव और कहानियों से नहीं बयाँ करता बल्कि उन तरल और ठोस सवालों की उपज़ से फैलता है जिनको जीवन के हर मोड़ का स्वाद नसीब होता है।

जिससे रची है - Trickster City Book.

Tehelka Magazine, Vol 7, Issue 10, Dated March 13, 2010
http://www.tehelka.com/story_main44.asp?filename=hub130310slum_doggerel.asp

इनके साथ मुलाकात में "जीवन" और "जगह" के सवालों को लेकर बहस मे रखा गया।

लख्मी
Trickster City Group

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