Wednesday, June 9, 2010

ठोस तरलता



क्या हो अगर सारी दुनिया की ठोस और मजबूत चीज़ें एक दम से तरलता में बदल जाये?
अगर आप किन्ही ठोस चीज़ों को तरलता में देखना चाहेंगे वे कौन सी चीज़ें होगीं?

घर, जिसको समाजिक जिन्दगी का सबसे मजबूत और ठोस ढाँचा माना जाता है। उसके अन्दर बहते हर लम्हे, याद, अनुभव और फैसलें खुद को मजबूत करने के आइने बनते जाते हैं। लेकिन कल्पना में उसको तरल करके देखने की नाज़ूक उम्मीदें हमेशा चलती रहती है।

ये दुनिया कुछ उन कल्पनाओं की ही भांति है जिसको खुद मे तरल अहसास से घुसा जाता है। एक बार मे लगता है जैसे खुद को छूने का अहसास है।

ये भले ही किसी इफेक्ट से उपजती है लेकिन इससे जीवन की मूलधाराओं और मजबूत ढाँचों मे उस अहसास से दाखिल होने का अंदेशा देता है जिससे हम खुद को तरल कर सकते हैं।

डर, भय और खौफ ये सभी शब्द बेजान हो जाते हैं और चेहरे के भाव मे किसी और अक्श का जीवन पनपने लगता है।

लख्मी

2 comments:

अनिल रघुराज said...

राकेश और लक्ष्मी जी, मैं अर्थकाम के डैशबोर्ड से एक सूत्र पकड़कर यहां आया। वाकई दुनिया वीरों से खाली नहीं है। आप लोग जबरदस्त काम कर रहे हैं। इसी तरह का बारीक मंथन चलाते रहने की जरूरत है।

lakhmi said...

शुक्रिया अनिल,

हर लिखने वाले को हमेशा तलाश रहती है एक पाठक की, जो उससे बहस करे, उसके काम को समझे और नये आयामों मे उसे लेकर जाये, कई ऐसे संदर्भ बनाने की कोशिश करे जिसमे अनेकों नये शब्द और चित्र साथिदार बने।

हमें आपसे निरंतर बातचीत मे रहने मे अत्यंत खुशी महसूस होगी।

धन्यवाद