Tuesday, March 4, 2014

जबरन कोशिशें

हमे भूलने की आजादी नहीं है बस, याद रखने का आदेश मानना होता है। इसके विपरित अगर कोई भूलता है तो ये समझ जाना चाहिये की हमारी ज़िन्दगी में क्या गिर गया व क्या छूट गया।

लगातार घोसला बनाने वाली जीवन की संभावनाएँ अपने आसपास को सुनने के लिये इशारा करती हैं। जैसे जीवन के सभी नकाबपोश चेहरे किसी अंजान वस्तु की तरह आसमान के नीचे अपना तमाशा स्वयं ही देख रही हो।

हम अगर अपने दिमाग के कोनों को कुछ समय के लिये भूलकर अगर देखें तो टूटे -फूटे खंडहरनूमा आकर और तरह-तरह की सतह नज़र आयेगीं जिनके ऊपर बुलबुलों सी अनगिनत झलकियां फैली हैं। उनके मद्देनजर किसी बड़े व ठोस आकार को सोचा जाये जिससे अपनी वापसी के मायने बनाये जा सकें। हम इंसान सिर्फ उन ठोस आकारों को बनाने की कोशिश में जुटे हैं।

2 comments:

प्रमोदपाल सिंह मेघवाल said...

आपका ब्लॉग पठनीय हैं। दिल से लिख्ी गई पोस्टे हैं।

प्रेम सरोवर said...

vey nice expression. visit my new post "dreams also have life".