Friday, June 26, 2009

आज हम कहाँ है?



आज हम कहाँ है और कल हम कहाँ थे और न जाने - आने वाले कल में हम कहाँ होंगे? शायद ये सबको पता है मगर फिर भी हम अन्जान से होकर अपनी दैनिकता में शामिल हो जाते है। कब कहाँ किस जगह कोई घटना हमारा इंतज़ार कर रही है। रोज़ ऐसी घटनाओं और हादसो के चुंगल से हम जाने-अन्जाने में बच निकलते है। जब वक़्त को निचौड़कर देखते हैं तो उसमें हमारी हर सांस का हिसाब होता है। यूँ ज़िन्दगी बीत जाती है और हम एक नये शरीर में प्रवेश कर लेते हैं। पुर्नजन्म भूल जाते हैं। वो जन्म जो पहले सफ़र कर चुका है उसकी खोज कहाँ है?

राकेश

2 comments:

‘नज़र’ said...

गहरी बात

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मिलिए अखरोट खाने वाले डायनासोर से

ओम आर्य said...

sochane laga man ki kaha the ham pichhale janm me ............bahut hi gahari baat